हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

खामोशियां कुछ कहती हैं

पहाड़ी धुंध मेंछिपी अनकही बातेंसुनती है पगडंडी रात की आँचलधीमे स्वर में गातीटूटते तारे चाँद की लकीरजल में थरथरातीअनकहा सपना

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हाइकु/सेदोका

आत्मानुशासन

सूरज की किरणेंधीरे-धीरे मन को छूतींधैर्य सिखातीं पत्थरों की राहकदम संभलकर चलते हैंसंतुलन सिखाती हवा की सरसराहटपत्तों को छूती धीरेशांति

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हाइकु/सेदोका

मुश्किलों से जूझते हुए

धूप की धारकंधों पर गिरतीरास्ता तपे थका सफररेत से उभरतीनई उम्मीद धुंधले कदमकठिनाइयों में भीचाल न टूटे अंधेरी राततारों की

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