मत की चोरी
जनता के अधिकार पर, मंडराता अंधकार।मत की चोरी रोकना, लोकतंत्र का सार।। आरोपों के दौर में, उठते कई सवाल।सच क्या
Read Moreजनता के अधिकार पर, मंडराता अंधकार।मत की चोरी रोकना, लोकतंत्र का सार।। आरोपों के दौर में, उठते कई सवाल।सच क्या
Read Moreकी थी एक दिन नई शुरुआत,कुछ टूटे-फूटे शब्दों के साथ,भावों का समंदर उफन रहा था,मन कुछ लिखने को कह रहा
Read Moreहर अपना अपना नहीं, भ्रम में रहना छोड़ ।समय पड़े तो देखिए, कौन निभाता जोड़ ।। रावण को विश्वास था,
Read Moreउनका मशक्कत तो सिर्फ चुनावी समय में होता है,जो जीत गए हंसे पांच सालजनता तो रोने के लिए है इसलिएपूरे
Read Moreहाँ, वह चंदेलों की बेटी थी, गोंडों की बनी थी बहू,माटी की आन बचाने गई, रण की धधकती धू-धू।जन्म मिला
Read Moreजनता के अधिकार पर, भारी सत्ता-तंत्र।कहने को तो देश में, है आज लोकतंत्र।। कुर्सी की खातिर यहाँ, रिश्ते हुए तमाम।नीति
Read Moreतुम हर वक़्तसबके अंदर झांकते होढूंढते होकुछ बुराइयाँढेर सारी कमियाँयह अच्छी बात हैकभी अपने अंदर पल रहेकुछ ईर्ष्याकुछ खुरापातइनको भी
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