बाल कविता

बाल कविता

बाल कविता – कोयल कुहू- कुहू कर बोली

कोयल कुहू- कुहू कर बोली।उठो बालको आई होली।। फूल खिले हैं क्यारी -क्यारी।रंग-बिरंगी है तैयारी।। गेंदा और गुलाब महकते।जिन पर

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बाल कविता

नन्हा मुन्ना रजाई में

नन्हा बच्चा जाग गया,रजाई में मुस्काया।धीरे-धीरे आँखें खोली,मम्मी को बुलाया। नरम-नरम सी रजाई है,उसमें छिपकर खेले।कभी इधर तो कभी उधर,हँसते-हँसते

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