सुबह सवेरे
मुर्गा ने देखो बांग लगाई जल्दी-जल्दी छोड़ो रजाई सुबह सवेरे आंखें खोलो मन के सारे तालें खोलो माता-पिता के चरण
Read Moreमुर्गा ने देखो बांग लगाई जल्दी-जल्दी छोड़ो रजाई सुबह सवेरे आंखें खोलो मन के सारे तालें खोलो माता-पिता के चरण
Read Moreमछली को जब हुआ ज़ुकाम। जा पहुँची डाक्टर के धाम।। डाक्टर बोला ‘मछली रानी। बतलाओ निज रोग कहानी।।’ मछली बोली
Read Moreबूँद कहते हैं मुझे सब मोद से। मैं निकलती बादलों की गोद से।। बादलों ने ही मुझे पाला सदा। मैं
Read Moreमेरी गुड़िया हैं नखरीली, प्यारी प्यारी बड़ी चुलबुली, सुनहरे रेशम से केश घुंघराले, गाल गुलाबी गुलाब हो खिले। नीरज नयन
Read Moreभीगी-भीगी सुबह हो गई। मेघों की यह विजय पय मई।। देखो काले बादल आए। खेत, बाग, वन में वे छाए।।
Read Moreमछली रानी मुझसे बोली बन जाओ तुम मेरी सहेली। जल जीवन है इसे बचाओ, इसको खाली नहीं बहाओ। नदी सरोवर
Read Moreबिल्ली चढ़ी पेड़ पर पेड़ पर था बन्दर बिल्ली जोर से गुर्राई डर रही थी अंदर ही अंदर बन्दर को
Read Moreसात रंग की पाँती सोहे। वक्र,गगन में दृग मन मोहे।। यह शुचि इंद्रधनुष कहलाता। हम सबका वह मन बहलाता। सुबह
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