अतिक्रमण संकट से पारिस्थितिकी, खाद्य और जल सुरक्षा को खतरा है
1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद से भारत के वन संसाधन हमेशा अतिक्रमण का शिकार रहे हैं। भूमि
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Read Moreटिटहरी कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि प्रकृति का मौन प्रहरी है। किसान उसके अंडों की संख्या, स्थान और समय देखकर
Read Moreशरद ऋतु वर्षा के बाद सितंबर से नवंबर तक विस्तृत होती है। यह ऋतु न तो अधिक गर्मी का बोझ
Read More“बारिश केवल राहत नहीं, जिम्मेदारी की भी परीक्षा है — बिजली से सावधानी, घर में रहकर सुरक्षा और समाज में
Read Moreबढ़ती जन संख्या तथा विभिन्न पहलुयों द्वारा इस का दुरउपयोग पानी का स्तर कम कर रहा है। पानी का प्रयोग
Read Moreसमुद्र के बिगड़ते पारिस्थितिकी तंत्र की समस्या को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक आगाह करते रहे हैं। मगर मनुष्य के
Read Moreमनुष्य भौतिक लिप्साओं और आपाधापी की जिंदगी में प्रकृति में हो रहे सूक्ष्म परिवर्तनों को महसूस नहीं करता। साथ ही
Read Moreमहाराष्ट्र के पालघर में एक पालतू कौआ इंसान की बोली मराठी बोली में आई,बाबा जैसे वाक्यांश बोलता है।इसके अलावा वो मराठी भी समझता
Read Moreपिछले 20 सालों में दुनिया बदल गई है। इस तरक्की ने हमें ढेर सारी खुशियाँ दी हैं। तरह-तरह के साधन
Read Moreभारतीय दर्शन के अनुसार, मानव सभ्यता का विकास हिमालय और उसकी नदी घाटियों से माना जाता है। आज विकास के
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