भाग्य, पुरुषार्थ और नियति
भाग्य : भाग्य, प्रारब्ध, संचित कर्म-फल जन्म के समय जीव कोई पुरुषार्थ नहीं करता यद्यपि उसका जन्म किस कुल (परिवार)
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Read Moreप्रस्तावनाजीवन एक रहस्यमय यात्रा है — जिसे व्याकरण शास्त्री शब्दों की संरचना में देखता है और साहित्यकार भावनाओं के प्रवाह
Read Moreभारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग
Read Moreतकनीक की वैश्विक बिसात पर भारत अब मोहरा नहीं, चाल चलने वाला खिलाड़ी बनता दिख रहा है। फ्रांस के नीस
Read Moreभारतीय सेना का इतिहास पराक्रम, शौर्य और अप्रतिम बलिदान की गाथाओं से समृद्ध है। स्वतंत्रता के बाद से ही हमारी
Read Moreसमय का पहिया निरंतर घूमता रहता है। जीवन का हर चरण अपने साथ नई चुनौतियाँ, अनुभव और जिम्मेदारियाँ लेकर आता
Read Moreआजकल टेलीविजन पर अक्सर एक विज्ञापन देखने को मिलता है यह विज्ञापन वर्तमान पीढ़ी की बदलती मानसिकता और हमारे पारिवारिक
Read Moreस्कंदपुराण में एक सुंदर श्लोक हैअश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।।कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।। अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता
Read Moreवैश्विक स्तरपर भारतीय समाज में सदियों से गृहिणी को परिवार की धुरी माना जाता रहा है,किंतु विडंबना यह है कि
Read Moreभारत को युवाओं का देश कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि युवा ही किसी राष्ट्र की सबसे
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