लेख

भाषा-साहित्य

व्याकरण शास्त्री व साहित्यकार की दृष्टि में जीवन दर्शन

प्रस्तावनाजीवन एक रहस्यमय यात्रा है — जिसे व्याकरण शास्त्री शब्दों की संरचना में देखता है और साहित्यकार भावनाओं के प्रवाह

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

धर्मार्थ न्यासों की सामाजिक शक्ति

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग

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राजनीति

भारत अब सिर्फ विकसित नहीं हो रहा, विश्व को विकसित कर रहा है

तकनीक की वैश्विक बिसात पर भारत अब मोहरा नहीं, चाल चलने वाला खिलाड़ी बनता दिख रहा है। फ्रांस के नीस

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पर्यावरण

कौन कौन से पेड़ लगाएं कि ज्यादा लाभ हो

स्कंदपुराण में एक सुंदर श्लोक हैअश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।।कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।। अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता

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