काला धन का साम्राज्य और बेबस होती एजेंसियां
काला धन आज केवल किसी व्यक्ति, संस्था या देश की समस्या नहीं रह गया है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने
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Read Moreसूचना का अधिकार आज खुद ही सांस के लिए संघर्ष कर रहा है और सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।
Read Moreचुनावों के समय अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों के साथ होने वाले छलावे या राजनीतिक लोकलुभावनवाद के
Read Moreकांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने मुद्दों को धार देने के लिए ”छात्रों की गूंज” कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
Read Moreदक्षिण एशिया की भू राजनीति एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां सैन्य शक्ति, कूटनीति और तकनीकी वर्चस्व तीनों
Read Moreअंग्रेज चले गए, भारत स्वतंत्र हो गया, लेकिन औपनिवेशिक दौर के अनेक कानून आज भी किसी न किसी रूप में
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Read Moreइस देश का हर नागरिक चाहता है कि जब वह अस्पताल जाए तो उसे सबसे अच्छा डॉक्टर मिले, जब उसका
Read Moreभारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव घटाने के उद्देश्य से 2 नई सीधी संपर्क रेखाओं यानी
Read Moreलोकतंत्र का सबसे सरल अर्थ है—जनता का शासन, जनता के लिए शासन और जनता की भागीदारी वाला शासन। यदि इस
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