एक देह का विदा होना, कई घरों में सूर्योदय बन सकता है
जीवन का सबसे कठिन संघर्ष अक्सर अस्पताल की चारदीवारी के भीतर लिखा जाता है, जहाँ हर साँस उम्मीद और समय
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Read Moreपिछले विचार में हमने बताया कि प्राचीन भारतवर्ष में कर्मगत वर्ण व्यवस्था थी जिसमें चार वर्ण थे : ब्राह्मण, क्षत्रिय,
Read Moreहर सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को
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Read Moreघर सबसे पहले दीवारों से नहीं, किसी की प्रतीक्षा से बनता है। कभी शाम ढलते ही दरवाज़े पर हर आहट
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Read Moreसमाज में आत्महत्या को कभी भी न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है, किन्तु समाज की जिन विसंगतियों के कारण आजकल
Read Moreमनुष्य का वास्तविक संघर्ष बाहरी संसार से कम और अपने अंतर्मन से अधिक होता है। सभ्यताओं का इतिहास इस सत्य
Read Moreआज के समय में यदि किसी मध्यमवर्गीय परिवार से पूछा जाए कि उसकी सबसे बड़ी चिंता क्या है, तो उत्तर
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