त्योहारों पर ‘कल्चरल अटैक’
भारत की सांस्कृतिक संरचना में त्योहारों का स्थान केवल आनंद और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की
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Read Moreवर्तमान भारत में अस्पृश्यता को लेकर कई प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। एक विमर्श यह है कि भारत में
Read Moreआजकल जहाँ भी जाओ वहीं हर चीज में प्याज लहसुन पड़ा होता है । क्या पहले शादी विवाह नहीं होते
Read Moreविश्व एक ऐसे विरोधाभास के बीच खड़ा है, जहां एक ओर भारी मात्रा में खाद्य पदार्थ बर्बाद हो रहे हैं
Read Moreएक पिता और उसकी बेटी का रिश्ता दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत और गहरे एहसासों में से एक है। किसी ने
Read Moreआज की दुनिया में स्क्रीन से दूरी बनाना लगभग असंभव हो गया है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल और रात
Read Moreमुस्लिम समाज में ‘शाह’ शब्द केवल एक कुल-नाम या उपनाम नहीं है, बल्कि यह एक ‘लक़ब’ (पदवी) है जो गौरवशाली
Read Moreउत्तर भारत के गाँवों में गेहूँ की कटाई केवल एक मौसम नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव होती है। यह वह
Read Moreआज के समय में अगर कोई सबसे तेज़ी से फैलने वाली चीज़ है, तो वह है—“बकवास”। फर्क बस इतना है
Read Moreमकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों या किसी अपने की मृत्यु का गम—हर जगह
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