सामाजिक

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लहज़े की मिठास और क़िरदार की बुलंदी

​इंसानी ताल्लुक़ात (रिश्ते) बहुत नाज़ुक होते हैं। कभी-कभी लाख कोशिशों के बावजूद रिश्तों में वह गर्माहट नहीं रहती और कड़वाहट

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इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का संवेदनशील फैसला

भारत की न्याय व्यवस्था केवल कानून की व्याख्या करने वाली संस्था भर नहीं है, बल्कि वह समाज के नैतिक मूल्यों

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सामाजिक

फूहड़ कंटेंट, सोशल मीडिया और संस्कृति: जिम्मेदारी किसकी?

डिजिटल युग ने हमारे समाज की संरचना, सोच और अभिव्यक्ति के तरीकों को गहराई से बदल दिया है। आज मोबाइल

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इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जीवन गरिमा और कानून के बीच गहरी बहस

भारत में जीवन के अधिकार को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह

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फूहड़ कंटेंट, सोशल मीडिया और संस्कृति : जिम्मेदारी किसकी?

डिजिटल युग ने हमारे समाज की संरचना, सोच और अभिव्यक्ति के तरीकों को गहराई से बदल दिया है। आज मोबाइल

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सादगी भरी शादियाँ: अमीर लोगों को समाज के लिए उदाहरण क्यों बनना चाहिए

भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि एक बड़ा सामाजिक आयोजन भी माना जाता है। यहाँ शादी

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