फिर वो सुबह आएगी
शुष्क है यह भग्न उरनीर नयनों में भराताप विरहाग्नि सहे,कंपित हुई यह धरा।तिमिरमय इस चेतना मेंभोर फिर से क्या उगेगी?तृप्ति
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Read Moreहाय रे जमानाक्या है बतानाकैसे कैसे लोग हैसमझ ही न पाना नकली भेष बनाकरघूम रहे है छलने कोपहचान पाना मुश्किल
Read Moreमानव सभ्यता आज जिस मोड़ पर खड़ी है, वहां से पीछे मुड़कर देखने पर विकास की चमक दिखाई देती है,
Read Moreजंगलों का सन्नाटा अब पेड़ों में नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर कैद दिखता है। दुर्लभ पक्षियों, अजगर, पेंगोलिन और बाघों के
Read Moreदिल्ली केवल भारत की राजधानी नहीं, बल्कि सत्ता की वह पुरानी चौसर है जहाँ मोहरे बदलते रहते हैं, पर खेल
Read Moreआधुनिकता की आँधी और स्वार्थ रूपी दानव ने सभी मानवीय व सामाजिक मूल्यों को तहस-नहस कर दिया है I मानव
Read Moreजब से बृजमोहन की शादी हुई है। उनके अंदर संस्कार आ गये हैं। पत्नी के सामने अदब से रहने लगे
Read Moreजब बात चाय की होपकौड़े सहज याद आ जाते हैंदोनों की दोस्ती है बेशुमारदोनों एक दूजे के मन भाते हैं।
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