ग़ज़ल
तुम मुस्कुराते हो सनम सच में क़यामत ढाते हो।जब ज़ुल्फ लहराते हो बादल स्याह करके जाते हो।। पहलू में आकर
Read Moreसूरज आतिश बन गया, तपे नगर सब गाँव ।जीवों में अकुलाहटें, ढूंढ रहे सब छाँव ।।(१) लू चलती है गति
Read Moreप्रकृति की गोद में रची-बसी भारतीय धरती आज भी जैव-विविधता के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है, और
Read Moreछपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई,
Read Moreकागज़ की कश्तीभीगी नदियों पर चलती हैबालपन की हँसी मेंसमय तैरता जाता है छोटे से हाथों की दुनियाबड़ी उम्मीदें समेटे
Read Moreआज का विद्यालय केवल ज्ञान का मंदिर नहीं रह गया है; उसकी चौखट पर बाजार खड़ा दिखाई देता है—सजधज कर,
Read Moreजिनके पास हों एक से एक बढकरअत्यंत ही कुशल रणनीतिकारतब आगे भी ऐसे ही चमत्कारिकपरिणामों के लिए रहिये तैयार ।।
Read Moreश्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने में, देख लो चाहे दिल के नगीने में. यह पक्तियाँ केवल एक भजन
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