खामोशी से भी ऊँची आवाज़ छोड़ जाने वाला नाम : बशीर बद्र
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…” बशीर बद्र की यह पंक्ति आज स्वयं एक विदाई का सन्नाटा बनकर
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Read Moreसीमाओं पर धूल उड़ती रहीं, खतरे ने दे दी है दस्तक,मौन नहीं रहेगा देश हमारा, कभी ना झुकेगा मस्तक।घुसपैठ की
Read Moreभारत में किसी बस स्टॉप पर खड़ी स्त्री का दृश्य सामान्य प्रतीत हो सकता है, लेकिन यदि हम उसे थोड़ा
Read Moreभारत में धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है; वह सामाजिक प्रभाव, राजनीतिक शक्ति और आर्थिक संरचना का भी बड़ा
Read Moreसोच यही बस सब्र कर, मत कर मन संताप।सबको सब कुछ ना मिला, यही जगत का जाप।। अपनी-अपनी किस्मतें, अपने-अपने
Read Moreअख़बारों में कुछ बचा, ज़िंदा ज़मीर आज।तारीख़ और वार का, रखते जो अंदाज़।। मौत ज़मीरों की हुई, कैसी उठी पुकार।सच
Read Moreभारतीय विवाह व्यवस्था लंबे समय तक एक मौन धारणा पर टिकी रही—पुरुष कमाएगा, स्त्री बिना सवाल घर संभालेगी। इसी सोच ने
Read More1.माँगंगेजय होभागीरथीपापनाशिनीहे भवतारिणीतेरा जल निर्मल।2.माँगंगापावनतेरा जलअमृत सममोक्षदायिनीभव से तार देजीवन संवार दे।3.माँगंगाकी धाराशीतल हैअमृत समनीर है इसकापावन पापनाशी। — लीला
Read Moreगाँव निवाई में हर अमावस की रात एक अनजाना-सा डर उतर आता था. कच्ची पगडंडियाँ, घास-फूस के घर और दूर
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