डिफॉल्ट

मेरा जन्मदिन और यमराज की बधाई

अलख सुबह मित्र यमराज ने फोन घनघनाया,
मुझे गुस्सा तो आया फिर भी फोन उठाया
क्या यार! सुबह-सुबह और कोई काम नहीं था
जो तूने मेरी नींद से दुश्मनी निभाया।
यमराज ने मुझे हड़काया-
क्या तूने भाँग खाकर अपना जन्मदिन बिसराया
आज तेरा जन्मदिन है, बस इसीलिए मैंने फोन लगाया।
जन्मदिन की बधाइयाँ, शुभकामनाएँ सँभाल
धमाकेदार पार्टी का इंतजाम कर।
ओह! धन्यवाद प्यारे, जो तूने बताया
पर इसमें मेरा क्या लाभ है?
मेरी तो उम्र रोज ही घट रही है
और मुझे लगता है कि लोग मेरा मजाक उड़ा रहे हैं
या फिर जन्मदिन की आड़ में दुश्मनी निकाल रहे हैं
तभी तो मेरी लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं,
बधाइयाँ शुभकामनाओं के साथ उपहास कर रहे हैं।
मैंने अपने मन का भाव जब उसे बताया
तो वो एकदम से भड़क गया -तू एकदम गधा है,
दो चार कविताएँ क्या लिख लिया
पूरी तरह बेवकूफ हो गया है।
ये सब एक तरीका है लोगों से जुड़ने का
सुख-दुख बाँटने, औपचारिकता निभाने का
उम्मीद जगाने और विश्वास बढ़ाने का
जन्म के साथ ही प्राणी का जीवन छोटा होता जाता है
पर यह बात कौन और कितना मानता है?
अब ये सब छोड़ और नहा धोकर तैयार हो जा
यमलोक में तेरे जन्मदिन की
विशेष पार्टी की तैयारियां चल रही है।
सबसे बड़े केक का आर्डर दिया जा चुका है,
तेरे लिए अनोखे उपहार की कार्ययोजना को
अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मैंने उसे रोका – अरे यार!
मैं उपहार लेकर भला क्या करुँगा
यहाँ भी तो ला नहीं सकूँगा।
यमराज मुस्कराया – धैर्य रख मेरे भाया
तुझे लाने, ले जाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी,
क्योंकि तुझे यमलोक ही उपहार में देने काअध्यादेश लाया गया है,
नियमानुसार सारी प्रक्रिया को कानूनी स्वरूप दिया जा चुका है
साथ ही तेरे निवास का स्थाई प्रबंध भी
यमलोक के नवनिर्मित शांति निकेतन में कर दिया या गया है।
उसकी बात सुन मुझे गुस्सा आ गया
तू दोस्त है या दुश्मन भाया
जो इतना सब कुछ कर मेरा मजाक उड़ा रहा है,
जन्मदिन की आड़ में उपहार स्वरूप
मेरे गले में फंदा डाल रहा है,
यहाँ इतना बवाल क्या कम झेल रहा हूँ
जो वहाँ भी तू नया जाल बुनने में
नाहक अपना समय जाया कर रहा है?
फिलहाल तो मैंने तेरी बधाइयाँ शुभकामनाएँ सहेज ली है
तुने इतना सोचा – इसके लिए आभार धन्यवाद
और अब चुपचाप फोन रख दे भाया।
केक खाने का मन करे, तो शाम को लेकर आ जाना
दोनों मिलकर केक खायेंगे, जाम लड़ाएँगे
और जन्मदिन की आड़ में कम होते जीवन का
जमकर जश्न मनाएंगे, और अपनी कविता भी सुनाएंगे,
अच्छे होटल में खाना खायेंगे
खाने का बिल तुझसे भरवाएंगे
इस तरह अपना जन्मदिन मनाएंगे,
अखबार, टीवी और सोशल मीडिया पर छा जाएँगे
मेरे यार को दुनिया वाले भी तब अच्छे से जान जायेंगे।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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