राजनीति

आप  का  संताप

       ‘आप’ में जो कुछ हो रहा है उसमें आश्चर्य करने लायक कुछ भी नहीं है। जब नेता सत्ता का लोलुप हो जाय तो वो किसी भी हद तक जा सकता है और अरविंद केजरीवाल ने यही सिद्ध कर दिखाया है। मुझे मालूम है कि मेरी इस बात से कई लोग सहमत नहीं […]

आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 27)

यहाँ पर यह बता दूँ कि मेरे तइया ससुर श्री सत्य नारायण जी गोयल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अत्यन्त प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक हैं। वे संस्कार भारती के अखिल भारतीय महामंत्री भी रह चुके हैं। वे बहुत अच्छे फोटोग्राफर और चित्रकार हैं। पहले वे ‘अमर उजाला’ दैनिक के लिए फोटोग्राफी करते थे, फिर स्वतंत्र […]

कविता

सपनों में रिश्ते बुनते देखा

सपनों में रिश्ते बुनते देखा जब आँख खुली तो कुछ ना था; आँखों को हाथों से मलकर देखा कुछ ना दिखा; ख़्वाब था शायद ख़्वाब ही होगा। सपनों में रिश्ते बुनते देखा॥ जब ना यकीं हुआ आँखों को धाव कुरेदा ख़ूँ बहा कर देखा; बहते ख़ूँ से दिल पर मरहम लगा कर देखा; धाव था शायद […]

कविता

कन्या !!!!

कन्या कोई वस्तु नहीं  जो दान मे दी जाए घर घर का मान है अपमान न की जाए शील है सौन्दर्य है वैदिक ऋचा है वो देवता वन्दन करते स्वयं वन्दना है वो शक्ति है संघर्ष है लक्ष्मी की प्रतिमा है वो बुद्धि प्रबल करती स्वयं शारदा है वो सॄष्टि है श्रॄंगार है धीर धरा […]

कविता

उड़ने लगे रंग

फागुन की झोली से उड़ने लगे रंग मौसम के भाल पर इन्द्रधनुष चमके गलियों और चौबारों के मुख भी दमके चूड़ी कहे साजन से मै  भी चलूँ संग पानी में घुलने लगे टेसू के फूल नटखट उड़ाते चलें पांवो से घूल लोटे में घोल रहे बाबा आज भंग सज गई रसोई आज पकवान चहके हर घर मुस्काते चूल्हे हौले से दहके गोपी […]

कविता

तेरे एहसास ……..

दिल से उठते हैं ये बुलबुले एहसासों का सैलाब लिये उड़ना चाहते हैं ये खुले आसमान पर मगर दिल के बंद दरवाज़ों से टकरा चटक जाते हैं और हम लग जाते हैं उन्हें समेटने कहीं मैले न हों या कोई झांक न ले इनमें जानते हो ना दीवारों के भी कान होते हैं मगर कुछ […]

कविता

लिखती हूँ कलम से

  स्याही आंसूओं की होती है आज तेरे हर ज़ुल्म पर मेरी आंख रोती है कभी सोचा न था हमसफर दगा करेगा मुझे छोड़ विरानो में खुद किसी और को पसंद करेगा तुम्हारी इसी शिक्षा को अपना लिया दामाद ने बेटी को घर छोड़ गया खुद दूसरी ले आया पूछने पर बोला यही रीत हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिल मेँ फूल बनकर खिलती रही कुछ कुछ बातें दिल में ही शूल बनकर चुभती रही कुछ कुछ बातें जज़्बातों पे यकीं करना भी अब हुआ है गुनाह दिल में उतर कर छल करती रही कुछ कुछ बातें अचानक राख पर पैर पड़ा जब तो पता ये चला बरसों तक आग बन सुलगती रही कुछ […]

गीत/नवगीत

राम-भजन : निर्गुन

छन्द: बचपन  बीता  खेल-खेल में, मस्ती  में  तरुणाई धन-दौलत,यश के पीछे; जीवन-भर दौड़ लगाई देख  बुढ़ापा  थर-थर  काँपा, भूल  गई  ठकुराई कभी राम का नाम लिया ना,बिरथा जनम गँवाई ००००००० उजली चादर  मैली  कर ली, कैसे  प्रभु-घर  जायेगा । राम-नाम का सुमिरन कर ले, भव-सागर  तर  जायेगा ।। कभी न की संतों की सेवा, कभी […]

सामाजिक

श्री रामचन्द्र जी के महान जीवन से प्रेरणा

               आज आर्यकुलभूषण, क्षत्रिय कुलदीवाकर, वेदवित, वेदोक्त कर्मप्रचारक, देशरक्षक, शुर सिरताज, रघुकुलभानु, दशरथात्मज, महाराजाधिराज रामचन्द्रजी का जन्म दिवस है। सदियों से श्री राम जी का पावन चरित्र हमें प्रेरणा देता आ रहा हैं। यह कहने में हमें गर्व होता हैं की यदि मनुष्य रामचरित के अनुसार अपना जीवन व्यतीत […]