Monthly Archives: March 2015




  • कन्या !!!!

    कन्या !!!!

    कन्या कोई वस्तु नहीं  जो दान मे दी जाए घर घर का मान है अपमान न की जाए शील है सौन्दर्य है वैदिक ऋचा है वो देवता वन्दन करते स्वयं वन्दना है वो शक्ति है संघर्ष...

  • उड़ने लगे रंग

    उड़ने लगे रंग

    फागुन की झोली से उड़ने लगे रंग मौसम के भाल पर इन्द्रधनुष चमके गलियों और चौबारों के मुख भी दमके चूड़ी कहे साजन से मै  भी चलूँ संग पानी में घुलने लगे टेसू के फूल नटखट उड़ाते चलें पांवो से...


  • लिखती हूँ कलम से

    लिखती हूँ कलम से

      स्याही आंसूओं की होती है आज तेरे हर ज़ुल्म पर मेरी आंख रोती है कभी सोचा न था हमसफर दगा करेगा मुझे छोड़ विरानो में खुद किसी और को पसंद करेगा तुम्हारी इसी शिक्षा को...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल मेँ फूल बनकर खिलती रही कुछ कुछ बातें दिल में ही शूल बनकर चुभती रही कुछ कुछ बातें जज़्बातों पे यकीं करना भी अब हुआ है गुनाह दिल में उतर कर छल करती रही कुछ...

  • राम-भजन : निर्गुन

    राम-भजन : निर्गुन

    छन्द: बचपन  बीता  खेल-खेल में, मस्ती  में  तरुणाई धन-दौलत,यश के पीछे; जीवन-भर दौड़ लगाई देख  बुढ़ापा  थर-थर  काँपा, भूल  गई  ठकुराई कभी राम का नाम लिया ना,बिरथा जनम गँवाई ००००००० उजली चादर  मैली  कर ली, कैसे ...