Monthly Archives: March 2015

  • मेरी कहानी-12

    स्कूल हम रोज़ाना जाते थे और स्कूल खुलते ही स्कूल की एक खुली जगह पर एकत्र हो जाते। हर क्लास की अपनी अपनी लाइन होती। हर रोज़ दो हुशिआर लड़कों को सारे स्कूल के आगे खड़े...

  • जो भी हुआ, गलत हुआ

    जो भी हुआ, गलत हुआ

    क्रिकेट के विश्व कप का खुमार भारतीय जनमानस से उतर चुका है. भारतीय टीम अब घर लौट चुकी है. राष्ट्र धर्म और अकूत मनोरंजन वाला महंगा खेल ही भारतीयों में राष्ट्रधर्म की मदिरा पिलाता है. भारत...




  • कन्या !!!!

    कन्या !!!!

    कन्या कोई वस्तु नहीं  जो दान मे दी जाए घर घर का मान है अपमान न की जाए शील है सौन्दर्य है वैदिक ऋचा है वो देवता वन्दन करते स्वयं वन्दना है वो शक्ति है संघर्ष...

  • उड़ने लगे रंग

    उड़ने लगे रंग

    फागुन की झोली से उड़ने लगे रंग मौसम के भाल पर इन्द्रधनुष चमके गलियों और चौबारों के मुख भी दमके चूड़ी कहे साजन से मै  भी चलूँ संग पानी में घुलने लगे टेसू के फूल नटखट उड़ाते चलें पांवो से...


  • लिखती हूँ कलम से

    लिखती हूँ कलम से

      स्याही आंसूओं की होती है आज तेरे हर ज़ुल्म पर मेरी आंख रोती है कभी सोचा न था हमसफर दगा करेगा मुझे छोड़ विरानो में खुद किसी और को पसंद करेगा तुम्हारी इसी शिक्षा को...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल मेँ फूल बनकर खिलती रही कुछ कुछ बातें दिल में ही शूल बनकर चुभती रही कुछ कुछ बातें जज़्बातों पे यकीं करना भी अब हुआ है गुनाह दिल में उतर कर छल करती रही कुछ...