Monthly Archives: December 2019

  • वह दिन निश्चय ही आएगा

    वह दिन निश्चय ही आएगा

    दहले हुए दिल से, क्या लिखें और कैसे लिखें! लेखनी भी निःशब्द होकर सोच रही है, क्या लिखें और कैसे लिखें! सारी हदें पार कर दी हैं, स्वार्थपरकता और दरिंदगी ने, न्याय को भी सोचने को...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    2122 2122 2122 212 कुछ मुहब्बत कुछ शरारत और कुछ धोका रहा । हर अदा ए इश्क़ का दिल तर्जुमा करता रहा ।। याद है अब तक ज़माने को तेरी रानाइयाँ । मुद्दतों तक शह्र में...


  • मेरे शब्द 

    मेरे शब्द 

    जंग अपनों से अपने आप ही हारी है मैंने, घर टूटने का दर्द, घर टूटने से पहले महसूस किया है मैंने | मेरी ये शोहरतें खरीदी नहीं, श्रम से कमाई हैं – मौत की दस्तकें बड़े...

  • स्त्री-मन

    स्त्री-मन

    सिद्धान्त और भावना कॉलेज की कैंटीन में घंटों से बैठे हुए थे लेकिन उनकी अभी तक एक कॉफ़ी खत्म नहीं हुई थी । दोनों घंटों से एक दूसरे की आँखों में डूब कर उस रस का...


  • गंगा जमुनी तहजीब

    गंगा जमुनी तहजीब

    सुबह का समय ! एक रेस्तरां का दृश्य जिसमें बेतरतीब बिछी कुछ मेजों पर बैठे कुछ लोग नाश्ता कर रहे हैं । रेस्तरां में प्रवेश करने की जगह पर एक काउंटर है जहाँ रेस्तरां का मालिक...

  • कविता

    कविता

    देख रही हूँ फिर से बदल रहे हो तुम तोड़कर धारा से संबंध सारे आसमान में उड़ रहे हो तुम देखो प्रलंभन से जरा दूर रहना तुम अक्स तारों का क्यों फिर से ओढ़ रहे हो...

  • नववर्ष

    नववर्ष

    अलौकिक अवधारणा से पूर्ण हो नूतन वर्ष की परिकल्पना , संदेश प्रेम भरा संसार में हर पल फैलाना तुम । नववर्ष की उत्कंठा में पतझड़ को मत भूल जाना तुम , सार सम्पूर्ण जीवन का दो...

  • मेरा  देश

    मेरा देश

    मेरे देश की अनमोल बातें , मुझको याद दिलाती हैं । मैं हूँ पहले एक इंसान , मर्यादा यही सिखाती है । गाय हमारी पूजनीय माता , श्रद्धा से .. गहरा नाता है दूध देकर पितरों...