भाषा-साहित्य

पुस्तकें मानव के जीवन का ज्ञानाधार हैं

पुस्तकों का महत्त्व हर युग में रहा है और आगे भी रहेगा। पुस्तकें हमारे जीवन का बहुत बड़ा खजाना है। पुस्तकों का जितना खर्च करने पर, उपयोग करने पर यह खजाना सदा बढ़ता रहता हैं। पुस्तकें मानव को जीवन  जीने की कला को सिखाती हैं। एक इंसान को सही रूप से इंसान बनाने का काम […]

पर्यावरण

विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल)

जिस धरती को हम माता कहते हैं। जन्म देने वाली मां से ज्यादा उपकार धरती माता का है। जो हमारा पालन करती है। अन्न ,जल,फल से हमारे जीवन का उद्धार करती है। वह धरती माता ही आज प्रदूषित होती जा रही है। यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। आज पूरी दुनिया  की समूल मानव […]

कविता

अन्नदाता की चीत्कारों से देश में हो रहा हाहाकार

जिसका पसीना मेहनत से ओस बन उड़ जाता है। सर्दी, गर्मी, बरसात को हंसकर जो सह लेता है। ‌‌अक्सर गरीबी जिसके आंसू पीती रहती है। अकाल सदा उसका सीना कंपाता रहता है । धरती के सीने को चीर अन्न उगा जो देता है। सूरज की पहली किरण से अंतिम किरण तक धरती मां का वो […]

इतिहास

विश्व धरोहर हमारी सभ्यता की पहचान है

विश्व के प्रत्येक देश की धरोहर अपने राष्ट्र की अमूल्य संपदा, गौरवशाली संस्कृति की प्रतीक है। उस देश की निधि है। उस राष्ट्र की अनमोल विरासत है। उसे संभाल कर रखने की जरूरत है। क्योंकि यह हमारे पुरखों का उपहार है।अतीत की उपलब्धि और राष्ट्र का गौरव है। राष्ट्र का गौरवमय इतिहास है। हमारी धरोहर […]

कविता

मेरे देश की तकदीर है किसान

मेरे देश की तकदीर है किसान। भारत का भाग्य विधाता है किसान। देश का अन्न वीर सपूत है किसान। अपने पसीने से सोना उगाता है किसान। भूखों को जीवन दान करता है किसान। भूखों की झोलीयों को भरता है किसान हरियाली का सृजन करता है किसान। जीवों का पालन करता है किसान। दुखियों के दर्दों […]

कविता

क्यों है हिंदी को राष्ट्रभाषा बनने की मजबूरी

हिंदी हिंद अभिनंदन। मिलकर करें हम सब शत-शत वंदन। इसकी खुशबू से खिल जाए देश में यह कानन का चंदन। संस्कृत भाषा की प्रसून। भाषाओं की बगिया में महक उठे खुशबू का आंगन। निज भाषा के बिना सब सून साहित्याकाश में कैसे खिलेंगे सुमन! हिंदी को नहीं मिलेगा असल में सम्मान। तो रोजगार में होगा […]

इतिहास

स्त्री शिक्षा के जनक : महात्मा ज्योतिबा फुले

11 अप्रैल1827 में महाराष्ट्र में जन्मे महान समाजसेवी, क्रांतिकारी विचारक, कर्म योगी। स्त्री शिक्षा के जनक तथा नवभारत के निर्माता महात्मा ज्योतिबा फुले एक सच्चे राष्ट्र निर्माता थे।उनका मानना था कि जब तक समाज में जातिवाद खत्म नहीं होगा तब तक देश की उन्नति संभव नहीं है। महात्मा ज्योतिबा फुले नारियों को सामाजिक अधिकार दिलाना […]

पुस्तक समीक्षा

मानवीय संवेदनाओं की प्रहरी है डॉ. अंजु सक्सेना की कविताएं

श्रीमती डॉक्टर अंजु सक्सेना एक अनुभवी कवयित्री एवं सधी हुई साहित्यकार हैं। अपने काव्य संग्रह “गुबार” में हर तरह की रचनाओं से पाठकों का ध्यान अनेक पहलुओं पर आकर्षित किया है।इस काव्य संग्रह में 70 रचनाएं समाहित है । जिसमें  मानवता, नैतिकता, न्याय,अधिकार, पर्यावरण,सकारात्मक ऊर्जा, नीतिपरक,आशावादी दृष्टिकोण, रहस्यवाद, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज,अन्याय के प्रति आवाज, […]

कविता

जीवन में प्यार की जरूरत है सबको

मुझको मुझसे प्यार हुआ है। तभी तो आईने में कई बार निहारा है। दिल के आईने में उतारा है अपने को । कई बार सपने में पुकारा है देखने को। मन के आंगन में संवारा है मुझको । तभी तो बार-बार पुकारा है तुझको।  जीवन में प्यार की जरूरत है सबको।  ढाई आखर प्यार के […]

भाषा-साहित्य

भारत के जन-मन की आत्मा है हिंदी*

विश्व हिंदी सम्मेलन के द्वारा विश्व स्तर पर हिंदी का प्रचार प्रसार हेतु भारत में सर्वप्रथम नागपुर में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के तत्वावधान में 10 जनवरी 1975 से 14 जनवरी 1975 तक आयोजित हुआ। इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा हुआ था। इस सम्मेलन में 30 देशों के […]