गीतिका/ग़ज़ल

गजल

तेरी आंखों में प्यार देखा है बेहद और बेशुमार देखा है लाड़ पाया है मैंने अम्मा का मैंने भी मां का प्यार देखा है प्यार जिसने किया ज़माने में उसी को होशियार देखा है जिसने खिदमत करी बुजुर्गों की उसकी कश्ती को पार देखा है मुद्दतों बाद भी है दिल में वो बस उसे एक […]

कविता

ताजमहल

न जाने कब से चुपचाप खड़ा है ताजमहल और न जाने कब से चुपचाप बह रही है जमुना कौन कहता है पत्थरों को अहसास नहीं होता कोई पूछ कर तो देखे ताजमहल से कि जब जमुना का पानी उसे छू कर गुज़रता है तो क्या तरंगित नहीं होता होगा ताजमहल ? और जब चाँदनी रात […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुहब्बत में इतना जो तड़पाओगे तुम फ़क़त दुश्मनों में गिने जाओगे तुम जो तन्हाइयों में सिमट जाओगे तुम तो एक रोज़ खुद से ही घबराओगे तुम निगाहों से ओझल जो हो भी गए तो मेरे दिल से कैसे निकल पाओगे तुम ए मेरे गमों बस मुझे फिक्र ये है अगर मुझसे बिछड़े कहाँ जाओगे तुम […]

कविता

अपरिभाषित प्रेम

मैं तुम्हे कैसे बताऊँ कैसे समझाऊँ कि जो कुछ तुम मेरे बारे में सोचते हो वही सब कुछ मेरे अंतर्मन में भी करवट लेता है जो कल्पनाएं जो भावनाएं मेरे प्रति तुम संजोते हो वही मेरे अन्दर एक ज्वार की तरह हैं लेकिन फर्क इतना है बस तुम अपने अंतर्मन को शब्दों में वयक्त कर […]

कविता

एक जीवन ऐसा भी होता है

जब प्यार और विश्वास मिल जाते हैं एक जगह तब भी एक झीनी सी रेखा रहती है दोनों के बीच जैसे एक जगह पर समुद्र का नीला और हरा पानी मिल कर भी रहता है अलग उसी तरह हम साथ रह कर भी साथ नहीं हैं और अलग रह कर भी अलग नही मन की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मौसम की अंगड़ाई समझ, यह बदली क्यों छाई समझ। आंखें तेरी रोशन हैं, फिर क्यों ठोकर खाई समझ लिखने से पहले अपने, लफ़्ज़ों की गहराई समझ दिल में जब तूफान उठे, याद किसी की आई समझ आज नमिता खुश है तू, दिल में मस्ती छाई समझ — नमिता राकेश

कविता

नट

वो हम जैसा दिखता है पर हम जैसा है नहीं हम चलते हैं ज़मीन पर और बात करते हैं आसमान की वो चलता है रस्सी पर और बात करता है सिर्फ पेट की दिखाता है करतब अजब अनोखे अनूठे और एक पहिये की साइकिल रस्सी पर चलाते हुए अपने आस पास जुट आई भीड़ से […]

कविता

वर्षगाँठ

जब मैं पहली बार मिली तुमसे तो लगा जैसे अब हुई है मेरे जीवन की सही शुरुआत मानो मेरे जीवन के कैलेण्डर में जनवरी आ गया और ,धीरे धीरे एक एक मुलाकात में एक एक कर कई महीने ऐसे बीत गए कि पता ही नहीं चला कि कब तुम्हारे प्यार की चमकीली धुप लिए जून […]

कविता

नए रास्ते

जब आसमान सो जाता है और पृथ्वी भी हो जाती है ख़ामोश दिल के सभी दरवाज़े हो जाते हैं बंद रास्ते हो जाते हैं सुनसान मंज़िलें खो जाती हैं कोहरे में रात हो जाती है और भी स्याह तो कहीं दूर बहुत दूर सुनाई देती है आहट सुबह की रोशनी की दिखने लगते हैं नए […]