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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मौसम की अंगड़ाई समझ, यह बदली क्यों छाई समझ। आंखें तेरी रोशन हैं, फिर क्यों ठोकर खाई समझ लिखने से पहले अपने, लफ़्ज़ों की गहराई समझ दिल में जब तूफान उठे, याद किसी की आई समझ...

  • नट

    नट

    वो हम जैसा दिखता है पर हम जैसा है नहीं हम चलते हैं ज़मीन पर और बात करते हैं आसमान की वो चलता है रस्सी पर और बात करता है सिर्फ पेट की दिखाता है करतब...

  • वर्षगाँठ

    वर्षगाँठ

    जब मैं पहली बार मिली तुमसे तो लगा जैसे अब हुई है मेरे जीवन की सही शुरुआत मानो मेरे जीवन के कैलेण्डर में जनवरी आ गया और ,धीरे धीरे एक एक मुलाकात में एक एक कर...

  • नए रास्ते

    नए रास्ते

    जब आसमान सो जाता है और पृथ्वी भी हो जाती है ख़ामोश दिल के सभी दरवाज़े हो जाते हैं बंद रास्ते हो जाते हैं सुनसान मंज़िलें खो जाती हैं कोहरे में रात हो जाती है और...

  • कतार से परहेज़ क्यों?

    कतार से परहेज़ क्यों?

    अगर है परेशानी तो है। क्या इससे पहले हमने कभी परेशानी नहीं झेली ? क्या इससे पहले हम कभी कतारों में नहीं लगे ? भूल गए वो राशन की कतारें , मंदिरों में दर्शन के लिए...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    देख मेरी नजर गर मचल जाएगी ख़ामशी शोर में दिल की ढल जाएगी चढ़ते सूरज की पहली किरण देखना रात की सारी स्याही निगल जाएगी धूप चाहत की खिलने तो दे हमनशीं बर्फ़ अहसास की भी...

  • मेरे पापा

    मेरे पापा

    आज पापा नहीं हैं ।जब थे तब हैप्पी फादर्स डे कहने का चलन नहीं था लेकिन मेरे पापा खुश रहते थे ।मैने उन्हे कितना खुश रखा यह मै नही जानती मगर इतना जानती हूँ कि उन्होने...

  • तुम्हारी आंखें

    तुम्हारी आंखें

    जब भी पलकें बन्द करती हूँ आंखों के भीतर तुम्हारी आंखें दिखाई पड़ती हैं तुम्हारी आंखें सारी दुनिया भुला कर सिर्फ मुझे देखती आंखें तुम्हारी आंखों से छलकता सारा प्यार मेरे अन्दर तक समा जाता है...

  • चंद हाइकु

    चंद हाइकु

    जब तक  हम अपनी सहन शक्ति का प्रदर्शन करते रहेंगे तब तक  मेरे ये हाइकु ज़िंदा रहेंगे — 1 भारत वासी शान्ति के पुजारी हैं रहेंगे चुप       2 ज़ुल्म सहना हमारी आदत है ढाते...