नवीनतम लेख/रचना



  • स्वरचित हाइकु

    स्वरचित हाइकु

    स्वर्ण पिंजरा पराधीन आभास कैद विहग मन परिंदा दूर सुदूर यात्रा पल में करे चौच में दाना लंबी सुदूर यात्रा पक्षी करते मौन परिंदे हरी दरख्त डाली घरौंदे बुने प्यार की भाषा मूक विहग खग मौन...




  • स्वामी दयानंद एवं चित्तौड़

    स्वामी दयानंद एवं चित्तौड़

    स्वामी दयानंद अपने चित्तौड़ भ्रमण के समय चित्तोड़ के प्रसिद्द किले को देखने गए। किले की हालत एवं राजपूत क्षत्राणियों के जौहर के स्थान को देखकर उनके मुख से निकला कि अगर ब्रह्मचर्य की मर्यादा का मान...

  • सपनों में…..

    सपनों में…..

      सपनों में अख़बार के गमगीन पन्ने फड़फड़ाते रहे ख्वाब में रक्त से सने वो मरहूम बच्चे आते रहे सज़ा ए मौत भी कम है उन सभी दरिंदों के लिए सख़्त दीवारों में एक एक कर...


  • बावरा–भाग १

    बावरा–भाग १

    पत्थर पर कुछ लेख पुराने स्मृतियों के एक ठिकाने सांझ का सूरज जैसे ढलता खुद ही अपने आप को छलता पथ से भटका मंजिल भूला झूल निराशाओं का झूला पर है बढ़ता जाए जोगी मन की...

कविता