कविता

भैया इतना कर जाना तुम

राखी के त्योहार पर भैया इतना कर जाना तुम।
आधुनिकता की हौड़ में यूं बदल न जाना तुम।
बचपन के दिन वो प्यारे याद जब जब आते हैं।
उन मीठी यादों को कभी दिल से न भुलाना तुम।
ससुराल में रहती हूँ कभी कभी मेरा आना होगा।
मैं न आ पाऊं कभी फिर मिलने आ जाना तुम।
सास ससुर की सेवा अब तो पहला फर्ज है मेरा।
ममी पापा से भी यूंही सदा प्यार निभाना तुम।
रोज़ प्रभु के आगे जब जब शीश झुकाती हूँ।
तुम्हारी खुशी में खुशी मेरी यह न भूल जाना तुम।।।
कामनी गुप्ता ***

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |