गीत/नवगीत

“गीत”

स्थाई –
*****
जाग है जिन्दगी |
फाग है जिन्दगी |
छंद सा जी इसे ,
राग है जिन्दगी |….

अंतरा –
*****
एक हो मीत भी
हार में जीत भी
भाव ऐसे लिए
हम जियें जिन्दगी ….. जाग है जिन्दगी ……
धूप तीखी मिले
पर अधर हों खिले
मीत के संग में
खुश रहे जिन्दगी …… जाग है जिन्दगी ……
दूर हो चाँदनी
भूल मत रागिनी
यामिनी यामिनी
भोर हो जिन्दगी ……. जाग है जिन्दगी ……

धूप है छाँव है |
जिन्दगी काँव है |
अब सजा ले इसे
दाँव है जिन्दगी ……. जाग है जिन्दगी ……
काम है जो सही |
सो करो भी वही |
टालना जी नहीं ,
आज है जिन्दगी ……. जाग है जिन्दगी ……..
“छाया”

छाया शुक्ला

छाया शुक्ला "छाया" प्रकाशित पुस्तक "छाया का उज़ास"

2 thoughts on ““गीत”

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छा गीत !

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छा गीत !

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