कविता

अमन

अमूमन हम ‘अमन’ शब्द का प्रयोग करते हैं
शांति के लिए
शांति व्यक्तियों-समुदायों के बीच,
शांति राज्यों-देशों के बीच,
अमन शब्द की संरचना पर ध्यान दें
तो यह मन शब्द का विलोम है
मन के न होने की स्थिति को अमन कहते हैं
अतः यह केवल बाहरी शांति का प्रतीक नहीं है,
यह शब्द मनुष्य की आंतरिक शांति की कुंजी बन सकती है,
अमन यानी मन के न होने की अवस्था ही,
चित्त को शांत कर सकती है,
मन की क्रीड़ा ही बन जाती है हमारी पीड़ा,
जिसमें मन ही न रहा,
उसने उठा लिया शांति का बीड़ा,
अमन में प्रतिष्ठित हमारी मनोदशा सुखधाम देती है,
हमें सृजनता के नए आयाम देती है.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244