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गंगा दशहरा

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था.भागीरथ गंगा को, अपने पितरों के  उद्धार के लिए भगवान शिव की तपस्या कर,पृथ्वी पर लाए.
गंगा अवतरण की पौराणिक कथा का वर्णन इस प्रकार है:
प्राचीन काल में इक्ष्वाकु वंश में एक राजा हुए जिनका नाम सगर था. सगर एक प्रतापी और शक्तिशाली राजा थे.  राजा सगर के अश्वमेध  यज्ञ को भंग करने के लिए  देवताओं के राजा इंद्र ने यज्ञ के घोड़े को पकड़ उसे कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया.

उधर अश्वमेध घोड़े की तलाश में राजा सगर के 60 हजार पुत्र खोजते खोजते कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचे और घोड़े को वहां बंधा देख आश्रम पर  धावा बोल दिया. इसी समय तप में लीन कपिल मुनि की आंखें खुल गईं वो क्रोधित हो उठे. मुनि की आंखों में ज्वाला उठी और सगर के 60 हजार पुत्र पल भर में राख हो गए.

राजा सगर के एक और पुत्र अंशुमान को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने कपिल मुनि से अपने भाइयों की आत्मा के उद्धार की प्रार्थना की. तब कपिल मुनि ने उन्हें बताया कि अगर पवित्र गंगा का जल भस्म हुए सगर पुत्रों पर छिड़का जाए तो उन्हें मुक्ति मिल सकती है. अंशुमान ने गंगा को लाने के लिए बहुत तपस्या की लेकिन वो अपने भाइयों को कपिल मुनि के कोप से मुक्त नहीं करा सके. बाद में उनके पोते राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके उद्धार  के  लिए घोर तपस्या की और गंगा को धरती पर आने की उनकी प्रार्थना को स्वीकार करना पड़ा.

अब सवाल था कि गंगा धरती पर आएं कैसे? गंगा की धारा इतनी तेज थी कि उनके सीधे धरती पर आने का मतलब था तबाही. तब भागीरथ ने एक बार फिर तपस्या कर भगवान शिव से मदद की गुहार लगाई. भोले शंकर ने गंगा को अपनी जटाओं से होकर धरती पर जाने के लिए कहा और तब जाकर राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार हुआ और उन्हें  मुक्ति मिली.

भगीरथ आगे आगे जा रहे थे और गंगा उनके पीछे चल रही थीं राजा भगीरथ पतित पावनी गंगा को गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक गए. यहां उन्होंने कपिल मुनि से विनती की कि अब वो उनके पितरों को अपने श्राप से मुक्त करें. गंगा की अमृतधारा भगीरथ की कठोर तपस्या का फल थी. मोक्षदायिनी मां गगा को धरती पर देखकर महर्षि कपिल प्रसन्न हुए. उन्होंने सगर पुत्रों को अपने श्राप से मुक्त कर दिया.
ऐसी मान्यता है गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगा स्नान करने पर 10 जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है.इस अवसर पर दान पुण्य का बहुत महत्व है.
*हार हर गंगे*

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020