कविता

बीत गया यह वर्ष

आखिर तमाम आशंकाओं
दुविधाओं के बीच
यह वर्ष भी बीत गया,
कोरोना का खौफ ढंग से
मिटा भी नहीं कि
ओमिक्रान के दहशत का
उपहार देता ही गया।
बहुत सी खट्टी मीठी यादें ही नहीं
कुछ बहुत अच्छी तो कुछ
बहुत तीखी, कलेजा चीरती
खौफनाक और हिला देने वाली
घटनाएं, दुर्घटनाओं को
स्मृति शेष भी बना गया।
यह सही है कि यह वर्ष भी
आखिर बीत ही गया,
पर जाते जाते भी
सीडीएस विपिन रावत को पत्नी संग
बारह अन्य जाँबाजों को भी लील गया
हम सबके कलेजे को चीर गया।
फिर भी चलो आखिरकार
यह वर्ष भी बीत गया
अब तो इतिहास हो गया।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921