हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : नेताजी वोट के लिए सब खा लेंगे

चुनाव आते ही नेताजी जहाँ जाते हैं, भोज्य पदार्थ भी वहां के रीति-रिवाज के अनुसार परोसा जाता है। उसी माहौल में ढल जाते हैं। नेताजी को जनता के इरादों पर ही चलना पड़ता है तब जनता समझती है कि यह अपना नेता है।

नेताजी गरीब आदमी के घर गये तो गरीब ने टूटी खटिया पर बैठा दिया तो नेताजी ना कर ही नहीं सकते हैं। वोट का मामला था। भले इडली डोसा न खाने के भक्त है। दक्षिण भारतीय का वोट लेना है तो वहां का राष्ट्रीय भोजन इडली डोसा खाना पडेगा। वोट के लिए जनता अगर गधा को अपना राष्ट्रीय पशु मानकर बैठा दिया तो नेताजी को वोट लेना है तो उस गधे पर बैठना ही पड़ेगा।

उत्तर भारतीय लिट्टी- चोखा खिलाना पसंद करेंगे तो नेताजी मना थोड़ी करेंगे। नेताजी परिवर्तनशील होते हैं। जिस क्षेत्र की वोट की जरूरत होती है तो वहाँ की भाषा बोलेंगे। शाकाहारी है तो कोई फर्क नहीं है। वोट के लिए मांसाहारी तक बन जाते हैं। नेताजी रोटी अचार भी खा लेंगे। वोट के लिए कोई हर्ज नहीं।

जो कभी मंदिर, मस्जिद नहीं गये। वोट के लिए चले गये तो निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है। गधे को मामा कह दिये तो कौन सी इज्जत की खेती बिगड़ गयी। वोट लोग नि:शुल्क देते हैं। लोगों की भावना को बदलने की कला में पारंगत नेता को वोट मिल ही जाता है।

चुनाव के दौर में आम जनता ने नेताजी को भात मछली खिला दिया। कुछ नेता लोग सोंचे कि ई नेताजी तो जनता के ह्रदव में वास कर जायेंगे। कुछ ने तो टांग अड़ा दी जो बगुला भगत वाले थे।

अरे महोदय जी , येन केन प्रकारेण से कोई वोट का जुगाड़ बना रहा है तो किसी की नानी क्यों मरे। जिस दलित को लोग छूते नहीं थे, उनके घर में दूध भात खा लिये तो आपका दिमाग खराब क्यों हो रहा है भाई जान। वोट कोई श्रध्दावान नेता ही योग्य है जो आम जनता से नि:शुल्क वोट लेकर चला जाता है।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

Leave a Reply