पता सूरज का
सफेद कागज में
कलम से शब्द की ज्योति जलाकर
कवि ढूंढ़ता है पता
सत्य के सूरज का।
कूच
सत्य की लाठी के सहारे
आज भी बिना हारें
एक मसीहा आगे कूच कर रहा है
हिंदुस्तान के हृदय हृदय में।
— पुष्करराय जोषी
सफेद कागज में
कलम से शब्द की ज्योति जलाकर
कवि ढूंढ़ता है पता
सत्य के सूरज का।
कूच
सत्य की लाठी के सहारे
आज भी बिना हारें
एक मसीहा आगे कूच कर रहा है
हिंदुस्तान के हृदय हृदय में।
— पुष्करराय जोषी