कविता

बिल्वपत्र

बिल्वपत्र है तीन पत्तियों (त्रिदल) का रूप,

बिल्वपत्र की महिमा है अत्यंत अनूप,
इसमें त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश समाए,
सृष्टि-स्थिति-संहार शिव जी के तीन स्वरूप।

बिल्वपत्र सत्त्व-रज-तम तीन गुणों का प्रतीक,
सूर्य-चंद्र-अग्नि शिव के तीन नेत्र सटीक,
सावन की हरियाली में वृद्धिकारक बिल्वपत्र की,
इच्छा-ज्ञान-क्रिया तीन शक्तियाँ करतीं अतीक।

बेल के पवित्र वृक्ष का हर भाग स्वास्थ्यकारी,
बिल्वपत्र है शिव जी की तरह कल्याणकारी,
तन पवित्र, मन निर्मल, वाणी मधुर का संदेश,
देती हैं बिल्वपत्र की तीन पत्तियां मनोहारी।

तन-मन-वाणी अर्पित करके, शिवत्व सिखाए,
सत्त्व-रज-तम से ऊपर उठ, आत्म-ज्योति जलाए,
छोटा-सा यह पत्र मगर, महिमा इसकी अपरंपार,
बिल्वपत्र में समर्पण, श्रद्धा और शिव-भक्ति समाए।

— लीला तिवानी
(अतीक- बंधनमुक्त)

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244