ले हिंदोस्तां फिर अंगड़ाई
सबसे पहले दहेज प्रथा का, तुझको कलंक मिटाना है
बहुओं की रक्षा करनी है, उनको जलने से बचाना है
तिल-तिल जलती बेटी जब तक, प्राण बचा नहीं पाएगी
तेरी गौरव गाथा तब तक, कैसे जाएगी गाई?
ले हिंदोस्तां फिर अंगड़ाई।
छुआछूत का भाव अभी तक, मिटा नहीं है भारत से
जाति-पांति का रोग अभी तक, घटा नहीं है भारत से
जाग-जाग रे भारत फिर से, दूर भगा दे कुटिलाई
उस ज्योति को प्रज्वलित कर दे, बापू ने जो स्वयं जलाई
ले हिंदोस्तां फिर अंगड़ाई।
तिलक-गोखले बन हर बच्चा, जीवन-दीप जला सकता है
गांधी-गौतम-वीर शिवा बन, शत्रु दूर भगा सकता है
फिर झांसी को छुड़ा सकेगी, हर बाला बन लक्ष्मीबाई
गीता-अमृत प्याला देकर, दे अर्जुन को तरुणाई
ले हिंदोस्तां फिर अंगड़ाई।
— लीला तिवानी
