दो नयनों की अमर कहानी
दो नयनों की अमर कहानी,
थोड़ा-सा चंदन थोड़ा-सा पानी,
ये नयन कभी खुशियों का तराना,
कभी विदाई-जुदाई की निशानी।
जब मिल जाते हैं चंदन और पानी,
बन जाती है एक नयी कहानी,
आनंद की लहरें उठतीं-बिछलतीं,
उन्मादित सुगंध करती मन को रूहानी।
आँखों में छुपे हैं जाने कितने एहसास,
ख़ामोशी की सदा, मिलन की आस,
नयनों की भाषा भी बड़ी निराली,
कभी मुस्कान, हैरत, सम्मान, विश्वास।
आँखें ही सावन बनकर बरसती हैं,
उम्मीद की किरण बनकर चमकती हैं,
मौन का मिठास, दुआओं का उजास,
जीवन के हर रंग की कहानी कहती हैं।
— लीला तिवानी
