मैं कविता हूँ
एहसासों का शब्द रुप मैं कविता हूँ।
कविता संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति है,
मौन के मुखर होने की प्रेरक प्रस्तुति है।
काव्य स्याही से नहीं, आत्मा की अनुभूतियों से रचा जाता है,
हर सच्चा शब्द, समय की सीमाओं से परे अमर हो जाता है।
काव्य शब्दों का केवल श्रृंगार नहीं,संवेदनाओं का विस्तार है,
जो मन की मौन धड़कनों को भी स्वर दे देता है।
कविता एहसासों का शब्द रुप है,
काग़ज़ पर उकेरा सुन्दर स्वरूप है।
मैं मौन के मुखर होने की प्रेरक प्रस्तुति हूँ,
स्याही से लिखी नहीं, आत्मा की अनुभूति हूँ।
समय की सीमाओं से परे अजर-अमर शब्द हूँ,
मैं सागर हूँ, जलद हूँ, क्षितिज हूँ, धरा हूँ, अब्द हूँ।
कवि की कमनीय कल्पना के भावों की भव्यता हूँ,
रसों के रसीले सृजन की सुभग-सौम्य सरलता हूँ।
कवि की कलम के जादू की खनकीली खनक हूँ,
हर रूप में वरदान हूँ, भावों की भव्य-भीनी महक हूँ।
महज शब्दों की कड़क नहीं, उलझनों का सुलझाव हूँ,
मन की मौन धड़कनों का स्वर हूँ, भावों का प्रभाव हूँ।
— लीला तिवानी
अब्द- आकाश
