बाल गीत – मेला
मुझको बड़ा सुहाना लगता,
कोई भी हो मेला,
मेले में हो सजे-सजाए,
लोगों का बस रेला।
कुल्चे-छोले-रबड़ी-कुल्फी,
खेल-खिलौने न्यारे,
झूले-हाथी-ऊंट सवारी,
मेले के खेल निराले।
— लीला तिवानी
मुझको बड़ा सुहाना लगता,
कोई भी हो मेला,
मेले में हो सजे-सजाए,
लोगों का बस रेला।
कुल्चे-छोले-रबड़ी-कुल्फी,
खेल-खिलौने न्यारे,
झूले-हाथी-ऊंट सवारी,
मेले के खेल निराले।
— लीला तिवानी