कविता

कृष्ण की व्यथा

कहने को तो नागर ने सब कुछ रचा,
पर मोहन के जैसा दुख किसने सहा,
जन्म लेते ही छूटे निज मात-पिता,
इससे बढ़कर किसी की क्या होगी व्यथा।

छूट गईं मथुरा, छूटी द्वारका,
बंसी छूटी, छूटे सब सखा,
जो बसती रही, हृदय में सदा,
छूट गई बरसाने की वो राधा।
सब ने तो सुनी बंसी की धुन,
पीड़ा को सिर्फ नटवर ने चखा।
कहने को तो नटवर ने…….

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com