कविता

जिंदगी

प्रेम नेह पावन रस धारा, परमात्मा वर जिंदगी।

धर्म-कर्म मानवता अंतस, जीव दया हो बंदगी।।

कलकल बहता निर्मल झरना, सेवा संयम भावना।

स्वस्थ-मस्त हो जीवन सबका, उपकारी हिय कामना।।

जीवन सुंदर सुरभित बगिया, 

हल्की-हल्की धूप हो।

अलि गुंजन मधुरिम मन भाता, तितली खिलता रूप हो।।

उल्लसित आनंदमयी हो, हर पल हर दिन जिंदगी।

मानव जीवन की सार्थकता, प्यारे हो साथी सँगी।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८