माँ लक्ष्मी आई
विधा- कविता
शीर्षक- माँ लक्ष्मी आई
लक्ष्मी आई भर-भरकर धन लाई,
साथ में खुशियां भरकर लाई,
दीप जलाएं प्रेम के हम-तुम,
मिटाने मन का अंधेरा आई।
स्वर्णिम आभा लेकर आई,
दीपों की सौगात सजाई,
लक्ष्मी जी-संग गणपति आए,
हर घर खुशहाली है छाई।
मंगल कलश सजाकर लाई,
आशाओं की ज्योत जलाने आई,
नई उमंगें संग में लेकर माँ लक्ष्मी,
माँ लक्ष्मी भाग्य जगाने आई।
दया, धर्म और सत्य के मोती,
जलाएँ जीवन की नव जोती,
माँ लक्ष्मी इतनी कृपा बरसाएँ,
पूरी कर पाएँ हर एक चुनौती।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
