हर बार बेटा बहू ही गलत नहीं होते
इस कलयुग में संयुक्त परिवार विभक्त होते छंट रहे है, इस विडम्बना के लिए किसको दोषी समझा जाए? ज़्यादातर लोग
Read Moreइस कलयुग में संयुक्त परिवार विभक्त होते छंट रहे है, इस विडम्बना के लिए किसको दोषी समझा जाए? ज़्यादातर लोग
Read Moreबच्चों के सारे शौक़ पूरे करना हर माँ-बाप की ख़्वाहिश होती है, खुशी होती है। अपने ख़्वाबों को परे रखकर,
Read Moreबुलंद भारत की तस्वीर में रंग भरने का काम आजकल की युवा पीढ़ी बखूबी कर रही है, जरूरत है उनको
Read More“महिला दिवस पर स्त्री विमर्श शोभा नहीं देता, जो पहचान का मोहताज नहीं ऐसे वंदनीय चरित्र की गाथा लिखनी है”
Read Moreआज टीवी पर “मास्टर शेफ़” नाम का शो देखा, तो विचार आया कि सच में हमने बौद्धिक तरक्की कर ली
Read More“जैसे उब चुका संसार एक समय की लाज शर्म के गहनों से लदी और दहलीज़ के भीतर सलिके से रहती
Read Moreप्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज़ नहीं एक ख़ामोशी है, सुनती है, कहा करती है न ये बुझती है, न
Read Moreसोचिए साहित्य न होता तो? ज्ञान का स्तर बुद्धि के नक्शे में नीचे की सतह पर मृत्युशैया पर लेटा होता।
Read Moreमाना कि ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते इंसान को कुछ पल खुशियों के, हँसी मजाक के चाहिए होते है जिसका
Read Moreक्यूँ सिर्फ़ औरतों के लिए हर परंपरा, हर नियम-धर्म पालने की परंपरा सदियों से दोहराई जा रही है? कल एक
Read More