विश्वास
भागदौड़ की इस दुनिया में,अब वक़्त नहीं अपनेपन का,हर रिश्ता बस ज़रूरत से जुड़ा,एहसास है अधूरेपन का।विश्वास के सहारे जीते
Read Moreमैं पुतला रावण कासज रहा हर साल की भांति,हो गया तैयार फिर से जलने के लिए..मानव है चालाक बहुत,है जानता
Read Moreआज समाज में चहुँ ओर हिंसा, अराजकता व झूठ का बोलबाला है। प्रत्येक वर्ष कागज़ के पुतले फूंक कर बुराई की
Read Moreआज के समय में युवाओं की सबसे बड़ी आकांक्षा विदेश जाकर पढ़ाई करने, नौकरी करने या वहाँ बसने की हो
Read Moreआज़ादी के सात दशक बाद भी हिंदी को वह स्थान नहीं मिला, जिसकी अपेक्षा एक राष्ट्रभाषा से की जाती है।
Read Moreभारत एक ऐसा देश है जहां प्रकृति की विविधता के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका भी बार-बार सामने आती है।
Read Moreशिक्षक को सदियों से समाज का मार्गदर्शक और अंधकार में प्रकाश का दीपक माना जाता रहा है। भारतीय संस्कृति में
Read Moreनहीं जीवन है रुक-रुक कर जीनामँजिल जब हो अंधेरों में गुमशुदातमस हृदय में ज्ञान दीप जगाएसत्य पथ दिखाए गुरु महान
Read More