ग़ज़ल
शम्मा की तरह परवाना जलता रहेगा। ताक मे बैठकर वो आहे भरता रहेगा। नही आमंत्रण है उसे करीब आने का।
Read Moreइश्क तो अब आजमाया जा रहा है। खेल दिलो का दिखाया जा रहा है।। टूटकर बिखरता है बेचारा बार बार।
Read Moreयाद जो उनकी आये मुस्कुरा लिया करो! याद मे उनकी गजल कोई गा लिया करो!! है जो शोखियां बुलन्द महबूब
Read Moreअब न आयेगी लौटकर वो रात कभी! बांहो मे बांहे लेकर बैठे थे साथ कभी!! आंखो में आंखे डालकर मुस्कुराना
Read Moreअब न आयेगी लौटकर वो रात कभी! बांहो मे बांहे लेकर बैठे थे साथ कभी!! आंखो में आंखे डालकर मुस्कुराना
Read More