जिंदगी
आज आंखों में आंसू उतर आए। जैसे शाम को भूला कोई घर आए। कई सदियां बीत गई जैसे, और फिर
Read Moreहार यूँ तो मैं मानती नहीं मायूस होना जानती नहीं फिर भी लाज़िम है कभी ग़मग़ीन मैं हो भी जाऊँ
Read Moreलम्हों की चादर तले दबे कई साल मिले ख़ुशनुमा चेहरे सारे वही ग़म-ए-हाल मिले सोचती मैं थी हमेशा सब मेरे
Read Moreतुम सागर हो गहरे प्रेम का मेरे प्रियतम तुम प्रेम अथाह तुम में डूब कर मैं तर जाऊं है बस
Read Moreतू मर करके जी है ज़हर तो पी कभी कर्म कभी धर्म कहीं दया ना मर्म है ज्वाला जगी जो
Read Moreहाँ! मैं जोकर हूँ! औरों से हटकर हूँ रोते हैं सब जहाँ पर हँसता मैं डटकर हूँ बर्बाद हैं सब
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