सच्ची प्रगति है वह
कहते हैं गर्व के साथ हमबुद्धिमान हैं सभी जीवों में सेअपनी चाल से अन्य जीवों कोअपने अधीन में लेने का
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Read Moreकैद हो तुम, अंध विश्वासों के अधीन,वहीं, चार दीवारों के अंदर!कितने युगों तक, भ्रम में रहोगे!!यथार्थ से दूर, विविधता के
Read More‘भाषा’ मानव जीवन में अनोखा साधन है। जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को, भावनाओं को दूसरों तक पहुँचा सकते हैं
Read Moreकठिन होता है चलना जहाँ रास्ता ठीक नहीं है, पत्थर-कंकड, काँटों के बीच चलना मजबूरी होती है आम जनता का
Read Moreदुनिया में कई समाज हैं लेकिन सच का समाज कहीं मिल नहीं पाया हमें मनुष्य के अंदर मनुष्य नहीं स्वार्थ
Read Moreखाना पहले उनको दो जो सड़कों में, गलियों में भीख माँगते नज़र आते हैं असहाय अवस्था को पारकर आगे बढ़ने
Read Moreहे मंद मति !, अंध परंपरा का हे मेरी मूढ़ बुद्धि ! मैं छात्र हूँ, जिज्ञासु हूँ, विचारों का अधिकारी
Read Moreकठिन होता है समझना इस दुनिया को, हर जीव को, कभी असली से ज्यादा नकली बेहद अपनी दर्जा दिखाती है
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