रूपेश को मिला मानविकी में डाक्टरेट की मानद उपाधि
चैनपुर, सीवान, बिहार के युवा साहित्यकार एवं शोध छात्र, शिक्षक रूपेश कुमार को शिक्षा/साहित्य/सामाजिक क्षेत्र मे विशेष उपलब्धि के लिए
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Read Moreआजकल रिश्ते मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं। इंसान सामाजिक प्राणी है, और समाज में जीने के लिए उसके
Read Moreचलते हैं हम हँसते-हँसते, भीतर टूटी है साँसे,चेहरों पर तो रोशनी है, मन में बुझती है आशाएँ।जीवन की डोर मे
Read Moreमनुष्य के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब वह स्वयं से यह प्रश्न करता है – “मैं क्या
Read Moreतुम आई मेरे ज़िंदगी में जैसे बहार आई हो,सूने दिल में खुशियों की बौछार लाई हो। तेरी हँसी में बसी
Read Moreतेरे बग़ैर ये दिल सुना-सुना सा लगता है,हर एक लम्हा जैसे अधूरा अधूरा सा लगता है। तेरी बातें हवा से
Read Moreजिसे अपना कह कर अपनाया था,हर राज जिसे मैंने अपना समझाया था,जिसके संग हंसी के पल बांटे थे मैंने,जिसे अपनेपन
Read Moreपहलगाम की धरती काँपी,जब मासूमों पर वार हुआ,पर्यटकों की हँसी बुझा दी,आतंकी हमला शर्मसार हुआ। भारत चुप ना बैठा था
Read Moreपहाड़ों की गुफाओं में, गूंजा एक ओर शोर,फिर टूट गया अमन चैन का, हज़ारवां वो दौर,किशोरी हवाओं में, घुला घटा
Read Moreपिता की यादें जो हर वक्त दिल में बसी हैं,उनकी सख्ती में भी ममता का एहसास था,उनकी बातें,उनकी हंसी,वो हर
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