नारी दिवस की ज़रूरत नहीं : शुभ दिवस
अच्छा लगा थाजब बॉस ने बिना कहे,बिना जताए, बिना बताएऑफिस की मेज़ परसेलिब्रेशन का एक बड़ा पैकचुपचाप रख दिया था,ये
Read Moreअच्छा लगा थाजब बॉस ने बिना कहे,बिना जताए, बिना बताएऑफिस की मेज़ परसेलिब्रेशन का एक बड़ा पैकचुपचाप रख दिया था,ये
Read Moreअच्छा लगा थाजब बॉस ने बिना कहे,बिना जताए, बिना बताएऑफिस की मेज़ परसेलिब्रेशन का एक बड़ा पैकचुपचाप रख दिया था।वो
Read Moreकितनी बीती पूस की रातें,कितने स्वप्न बसंत के,याद दिलाती हर फागुन वो,अंतरमुखी प्रिय उस कंत के। पीली सरसों, पीत अमलतास,बिखरे
Read Moreअभी तो उसने फिर से जीना शुरू किया थापति के वियोग के बाद।धीरे-धीरे साँसों में लौटने लगी थी धड़कन,वजह था
Read Moreमैं शब्द चुनूँ,तुम मौन रहोभली लगे न यह रीत।कुछ तो कह दो,कुछ तो गह लो,हाय! जता दो प्रीत!सुन तो जरा
Read Moreमेरे जीवन के कुछ क्षण,हो जाती हूँ तुझमें मगन,खो जाती हूँ इस कदरकि तू ही बन जाता हैमेरा अभिन्न अंग।
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