दोहा मुक्तक
चलो मृत्यु से हम करें, मिलकर दो-दो हाथ।आपस में सब दीजिए, इक दूजे का साथ।मुश्किल में मत डालिए, नाहक अपनी
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Read Moreकल आनलाइन एक पत्र मैंने मृत्यु को भिजवाया,जिसका जवाब तत्काल आया,धैर्य रखिए जनाब, लिस्ट लंबी है आपका नाम लिस्ट में ही कहीं
Read Moreमेरा मानना है कि मानव भाषा विकास के साथ ही गीत का जन्म हुआ होगा। गीत संप्रेषण की वह विधा
Read Moreलीजिए, स्वीकार कीजिएमेरी अंतिम यात्रा का निमंत्रण,जिसे आप मेरे जीवन कीदूसरी बारात भी कह सकते हैं, और नहीं भीयह आपका
Read Moreवरिष्ठ कवयित्री/सेवानिवृत्त शिक्षिका डा. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ का ‘पूर्णिमांजलि’ और ‘पूर्णिमा भाव वीथिका’ के बाद बाल वाटिका पाठ को
Read Moreसमय-समय की बात है,जो अक्सर हम लोगों से सुनते और खुद भी कहते रहते हैं,पर समय को अहमियत अपने अनुकूल समय में
Read Moreआज पहली बार धीर को खुशी के साथ पूरी तरह आत्मसंतुष्टि हो रही थी। हो भी क्यों न? आखिर उसने
Read Moreजीवन में कुछ करनाऔर सफलता के शिखर पर चढ़ना है,तो मेरी तरह समझदार बनिये समय के साथ चलना सीखिए,समय परिस्थिति के
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