शिक्षक जो न होते
बड़ा सरल यह सोचना कि यदि शिक्षक न होते तो आज क्या होता? ऐसे ही मान लें तो कुछ नहीं
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Read Moreहे त्रिनेत्रधारी हे त्रिलोकीहे अविनाशी से औघड़दानी हे शिवकाशी, हे चंद्रधारीतुम ही शिव हो, तुम ही शव सम होहे गौरापति,
Read Moreमन की खुशी वस्तु नहीं अनुभूति हैये अनुभूति ही हमें खुशियाँ देती हैहमारे मन को खुशी का आभास कराती है,खुशी
Read Moreआजकल के बच्चों की दुनियामां से ज्यादा मोबाइल है,यह कहना बड़ा आसान हैपर इसके जिम्मेदार भी तो हम और आप
Read Moreतुम्हारे ख्वाब मेरी आंखों में फलफूल रहे हैं,न चाहते हुए भी कुलांचे भर रहे हैं।तुम्हारे लिए मेरा तो कोई ख्वाब
Read Moreमाना कि मैं तन से दिव्यांग हूँपर मन से तो नहीं हूंदुनिया की नजरों में मैं असहाय लाचार हो सकता
Read Moreभूतों का क्या है उनसे तो मेरा वर्षों पुराना याराना है मेरा मकसद किसी को डराना नहीं है, बस अपनी
Read Moreजिंदगी क्या है?हम सबके के लिए इसका न केवल अलग अलग जाल है,बल्कि सवालों का मकड़जाल हैपर हर सवाल का
Read Moreरक्षाबंधन यानी रक्षा का बंधन। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हर वर्ष इस पर्व को मनाया जाता
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