द्वैष दुर्भाव
हमारे बड़े बुजुर्ग,संत महात्मा औरहमारे धर्म ग्रंथ हमेशा यही बताते सिखाते हैद्वैष दुर्भावना से दूर रहो समझाते हैं।पर उन्हें शायद
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Read Moreहे गौमाता तुम्हें नमन है चरणों में तेरे नित वन्दन है तेरी महिमा का बोध नहीं हैं अज्ञानी मूरख हम
Read Moreरीता को उसकी ननद ने बड़े उत्साह से फोन कर बताया कि भाभी मैंने अपने भतीजे और आपके बेटे का
Read Moreजीवन के हर कदम परआपको खुद आगे बढ़ना हैकदम दर कदम आगे ही आगे बढ़ते जाना है,दो चार कदम तो
Read Moreजीवन की किताब हम पढ़ते ही रहते हैंउसके पन्ने पलटते ही रहते हैंअच्छे बुरे का विचार किये बिनाकुछ पन्ने पढ़ते,
Read Moreकई दिनों से मैं महसूस कर रहा हूंकि जब भी मैं घर के बाहर सुबह सुबहचाय के साथ अखबार पढ़ने
Read Moreईमानदारी से बताइएगा आप सब हमकोकि हम झूठ कहते हैंऔर आप ऐसा बिल्कुल नहीं करते।पर मैं जानता हूं कि हम
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