स्मृति के पंख – 10
जब सोना 20-22 रू0 तोला था, पोंड की सरकारी कीमत थी 15 रुपये। अंग्रेज लोगोें की कोठी पर चैकीदार रात
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Read Moreराम मंदिर आन्दोलन में मेरे विचारों के प्रकाशन के दौरान मेरे कई नये मित्र बने। उनमें दो नाम विशेष रूप
Read Moreहमारे साथ के मकान वाले भी कपूर थे। लाला हरीचन्द और गोकुलचन्द। लेकिन हमारे विचारों में बड़ा अन्तर था। वो
Read Moreउन दिनों श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन पूरे जोर-शोर से चल रहा था। राष्ट्रवादी विचारों का कार्यकर्ता होने के नाते मैं आर्यसमाजी
Read Moreकुछ अरसा बाद गढ़ी कपूरा में भाई श्रीराम (बहन गोरज के पति) का कोई खास काम भी न था। बहन
Read Moreपिछली कड़ियों में अपनी जापान यात्रा का पूर्ण विवरण दे चूका हूँ। जापान से लौटने वाले दिन सड़क पर जाम के
Read Moreमेरे दिल में भी बड़ा उत्साह था। बी.आर. के शाना बशाना काम करूं। बी.आर. ने मुझे कहा जैसी जरूरत होगी,
Read More28.10.1990 (रविवार) ये पंक्तियाँ मैं टोकियो से दिल्ली उड़ान के दौरान लिख रहा हूँ। मेरी पिछली रात उसी तरह सीटों
Read Moreअब दुकान का काम मैं पूरी तरह कर लेता। सुबह की ड्यूटी मेरी थी। सुबह दुकान खोलना तकरीबन 5 बजे।
Read Moreअब मैंने अपनी बुद्धि से थोड़ा काम लिया। सबसे पहले तो मैंने यह तय किया कि होटल में ठहरने का
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