खामोशी की डगर!
“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
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Read Moreआज अंजना बड़े ओहदे वाली थी, उसके घर में पीने को बहुत पानी था और समाज में इज्जत का पानी
Read Moreअर्पिता का पहला प्रेम योग था और वह अपना योग स्टूडियो चला रही थी, लेकिन 22 साल की उम्र में
Read Moreसमाचार जानने के लिए वह अखबार का जमाना था. मिन्नी ने एक दिन एक समाचार पढ़ा और एकदम शोर मचा
Read More“देखो अपने गाँव का अमित पूरे प्रखंड में अव्वल आया है मेट्रिक की परीक्षा में।” दीपक बाबू ने कहा।“अरे वाह।
Read Moreहर दोपहर कविता कहती — “मैं आराम कर रही हूँ।” पर हकीकत में वह रोती थी — टिफ़िन बनाते समय
Read Moreअपार्टमेंट के लिफ्ट में चढ़ते-उतरते सविता और मोहिनी में परिचय हुआ और धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। ग्राउंड फ्लोर
Read More“अरे…अरे, तरबूज भाई थोडा उधर हो जाओ। ” अंगुर ने धीरे से कहा। ” अरे जा, मैं आराम से बैठा
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