रहते सूरज इतनी दूर
रहते सूरज इतनी दूर। फिर भी दें गर्मी भरपूर।। देर नहीं पल की भी करते। अंबर में तुम नित्य विचरते।।
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Read Moreसुबह शाम पड़ती है भैया ठंड कड़ाके की। और रात की ठंडक तो है, धूम धड़ाके की। सुबह-सुबह की हालत
Read Moreजैसे ही शिखर को पता चला कि चंदा हथिनी के दल का एक बुजुर्ग हाथी तालगाँव के समीप नर्रा जंगल
Read Moreनई उमंगे सँग में लेकर नव प्रभात अब आया है। बुरा समय अब बीत गया है नई किरण इक आई
Read Moreरोज की तरह आज भी शाला में प्रातः कालीन राष्ट्रगान चल रहा था।इसके बाद बच्चों को सम्बोधित करते हुए प्रार्थना
Read Moreशीतकाल सौगातें लाया। ठंडी ऋतु का मौसम भाया।। छोटे दिन की लंबी रातें। अगियाने पर होतीं बातें।। गरम रजाई ने
Read Moreकड़ाके की ठंड पड़ रही थी। साँझ होते ही जंगल के सभी जानवर अपने-अपने घरों में दुबक जाते थे। ऐसा
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