बाल कविता – दूधवाला
घर-घर आता सुबह शाम,ड्रम दूध के हाथों में थाम।दरवाजे पर आवाज लगाता,संग में लस्सी भी लाता।सुबह-सुबह जल्दी है उठता,उठकर दूध
Read Moreघर-घर आता सुबह शाम,ड्रम दूध के हाथों में थाम।दरवाजे पर आवाज लगाता,संग में लस्सी भी लाता।सुबह-सुबह जल्दी है उठता,उठकर दूध
Read Moreनन्ही नन्ही छोटी चिड़ियों,तुम सब कैसे रहती हो?कैसे बना लेती हो घोंसला?मुझको पता हैं क्या खाती हो?गौरैया रानी उड़ मत
Read Moreबचपन में किसी त्यौहार के दौरान दादी एक कहानी सुनाया करती थीं।कहानी यह थी कि एक राजा ने आवाँ बनवाया
Read Moreआज है चौदह नवंबर का दिन,सब बच्चों का प्यारा दिन।नेहरू चाचा हमसे कहते,“बच्चे देश के फूल हैं बन।” हँसो, खेलो,
Read Moreठंडी-ठंडी चलती बयार,धूप भी लगती अब गुलजार।कप-कप काँपे हाथ-पैर,माँ बोले — पहन ले स्वेटर ढेर। सुबह नहाने का मन न
Read Moreझूला झूलें सपनों वाला,नीले गगन का है ये पाला।हवा संग बातें, बादल की चाल,छोटे-छोटे पंख, बड़ा हौसला बेहाल। चंदा मामा
Read Moreजग की शोभा पेड़ – लताएँ।अधिकाधिक हम पेड़ उगाएँ।। जहाँ पेड़ हों शांति समाए।छाया मिले अतिथि ठहराए।।रहते खग पशु भैंसें
Read More