बाल कविता
बच्चे सब मिल खेले खेलढोल बजाएं मस्ती केचार चार के टोले मेंखेले मिलकर संगो मेंघुमा चौकड़ी आंख मिचौलीबच्चों के है
Read Moreबचपन में किसी त्यौहार के दौरान दादी एक कहानी सुनाया करती थीं।कहानी यह थी कि एक राजा ने आवाँ बनवाया
Read Moreआज है चौदह नवंबर का दिन,सब बच्चों का प्यारा दिन।नेहरू चाचा हमसे कहते,“बच्चे देश के फूल हैं बन।” हँसो, खेलो,
Read Moreठंडी-ठंडी चलती बयार,धूप भी लगती अब गुलजार।कप-कप काँपे हाथ-पैर,माँ बोले — पहन ले स्वेटर ढेर। सुबह नहाने का मन न
Read Moreझूला झूलें सपनों वाला,नीले गगन का है ये पाला।हवा संग बातें, बादल की चाल,छोटे-छोटे पंख, बड़ा हौसला बेहाल। चंदा मामा
Read Moreजग की शोभा पेड़ – लताएँ।अधिकाधिक हम पेड़ उगाएँ।। जहाँ पेड़ हों शांति समाए।छाया मिले अतिथि ठहराए।।रहते खग पशु भैंसें
Read Moreचलो प्रगति का क़दम बढ़ाए,आजा भारत देश सजाएं।माला की किरणे घर तेरा ,चलो लक्ष्य से प्रीत लगाएं।आ जा भारत देश
Read Moreनन्ही चिड़िया, पंख पसारे,खुले गगन में उड़ने को प्यारे।सपनों की डोरी थामे चल दी,आसमान की ऊँचाई को छूने निकली। सूरज
Read More