कुकुभ छंद रचना
नन्हा सा बालक जब रोता, आंचल में छुप चुप होता। ममता की छाया में सोता, भरता सुख सागर गोता।। गोदी
Read Moreनन्हा सा बालक जब रोता, आंचल में छुप चुप होता। ममता की छाया में सोता, भरता सुख सागर गोता।। गोदी
Read Moreमाया की माया गजब, किसको करें दुलारकभी भतीजे पर लुटें, कभी भ्रात से प्यारकभी भ्रात से प्यार,बदल जाती हैं चीजेंउन्हें
Read Moreकल्याणी मन भावना, आस्था से कर भक्ति। ईश्वर प्रेम प्रभाव में, भव तारण की शक्ति।। भव तारण की शक्ति, पाप
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