खिचड़ी
खिचड़ियां पक रही दिमागों में किसको करना चित और किसको करना पट है बर्तन में पकी खिचड़ियां करती तन मन
Read Moreजागरूकता, प्रगतिशीलता, समानता, स्वतंत्रता रह जाते केवल नारे हैं अंधविश्वास, परंपराओं, समाज व धर्म से जो हारे हैं किनारे पर
Read Moreसंध्या की बेला है, या है सुरीला नग़मा, या कि लगा हुआ है सजीले रंगों का मजमा, सुनहरी-रुपहली, लाल-पीले रंगों
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